इटावा वर्तमान शिक्षा जगत में प्रोफेसर श्याम पाल सिंह का एक व्यक्तित्व एक प्रेरणा पुंज के रूप में उभर कर सामने आया है वर्ष 1968 में उत्तर प्रदेश के एटा जनपद की माटी में जन्मे प्रोफेसर श्याम पाल सिंह की प्रारंभिक शिक्षा की नीति एटा के परसोंन में पड़ी , जहां उन्होंने कक्षा 9 से 12वीं तक का सफर कड़े परिश्रम अटूट लग्न के साथ तय किया । उच्च शिक्षा के प्रति उनके अगाध रुझान ने उन्हें प्रयागराज विश्वविद्यालय की दहलीज तक पहुंचाया, जहां से उन्होंने स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र की उपाधि प्रयागराज विश्वविद्यालय से विश्वविद्यालय में टॉप कर डिग्री प्राप्त की
प्रोफेसर श्याम पाल सिंह जिनके मार्गदर्शक उनके पिता स्वर्गीय पातीराम जी जो स्वयं में एक समर्पित प्रधानाध्यापक थे वही प्रोफेसर श्याम पाल सिंह का गहरा प्रभाव स्पष्ट झलकता है , पिता से विरासत में मिले संस्कारों को अपनी असली पूंजी मानने वाले प्रोफेसर श्याम पाल सिंह का दृढ़ विश्वास है कि एक सच्चा शिक्षक केवल डिग्रियों के अंबार से नहीं पहचाना जाता बल्कि उसके व्यक्तित्व की असली चमक माता पिता द्वारा गढ़े गए संस्कारों और उच्च जीवन मूल्यों से आती है।
प्रोफेसर श्याम पाल सिंह का व्यवसाइक सफर उत्तर प्रदेश की सीमाओं को पार कर मध्य प्रदेश की हृदय स्थल तक पहुंचा, जहां उन्होंने एक चुनौती पूर्ण परीक्षा मध्य प्रदेश पीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर सरकारी पद पर कार्यभार संभालते हुए अपनी प्रशासनिक और शिक्षक योग्यता को लोहा मनवाया वर्तमान में वह इटावा जनपद के प्रतिष्ठित राजकीय महिला महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में अपनी गौरवमय में सेवाएं दे रहे हैं, जोकि उनके अटूट कर्मठता और अनुशासन का जीवन प्रमाण है।
प्रोफेसर श्याम पाल सिंह उच्च शिक्षा के नोडल अधिकारी भी हैं राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय इटावा में लगातार 6 वर्षों से प्राचार्य पद को प्रभावी तरीके से संभाल रहे हैं उनका जीवन उन हजारों छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है जो सीमित संसाधनों और संघर्षों के बीच में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।
प्रोफेसर श्याम पाल सिंह केवल पद की गरिमा तक सीमित नहीं है बल्कि वह समाज के उसे यथार्थ और सत्यता को रेखांकित करने के विश्वास रखते हैं जिसे अक्सर काल्पनिक कहानियों और किस्सों की भीड़ में अनदेखा कर दिया जाता है
पारिवारिक दृष्टि से देखें तो वह मोर्चे पर भी प्रोफेसर श्याम पाल सिंह एक सफल और दूरदर्शी अभिभावक के रूप में आदर्श प्रस्तुत करते हैं
उनका बड़ा पुत्र एटा में एक विद्यालय के प्रबंधक के रूप में नई पीढ़ी को शिक्षित करने का पुनीत कार्य कर रहा है,
वहीं उनकी सुपुत्री ने अपनी मेघा से महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी है बेटियों को कमजोर समझने वाली दखियानुसी सोच को करारा जवाब देते हुए उनकी पुत्री ने प्रशासनिक सेवा की गठन की तैयारी के साथ-साथ गेट 2025 अखिल भारतीय परीक्षा में 250 सी रैंक हासिल करते हुए पूरे परिवार और क्षेत्र को गौरवान्वित कर किया है।
प्रोफेसर श्याम लाल पाल सिंह के छोटे पुत्र प्रियांशु राजपूत ने नीट 2022 मैं 4000 भी रैंक के साथ सफलता पाई और उनके बेटे का एमबीबीएस में एडमिशन प्रदेश के बहुत ही प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर में हुआ प्रोफेसर श्याम पाल सिंह का यह वैचारिक और
शैक्षणिक सफर निरंतर जारी है और समाज को नई दिशा दिखाने के लिए उनकी यह प्रतिबद्धता आने वाले समय में सफलता के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।









