छिबरामऊ, कन्नौज: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए वर्ष 2026 के आम बजट पर छिबरामऊ से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक ताहिर हुसैन सिद्दीकी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बजट को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘दिशाहीन, निराशाजनक और जन-विरोधी’ करार दिया। सिद्दीकी ने कहा कि लगातार नौवें बजट में भी सरकार ने केवल खोखले वादे किए हैं, जबकि धरातल पर आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है।
मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा को मिली सिर्फ मायूसी
पूर्व विधायक ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं को इस बार आयकर (Income Tax) की दरों में बड़े बदलाव की उम्मीद थी। महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्ग को राहत देने के बजाय सरकार ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “आयकर में कोई राहत न मिलना यह दर्शाता है कि सरकार को आम आदमी की जेब खाली होने की कोई चिंता नहीं है।”
युवाओं और किसानों के साथ छलावा
ताहिर हुसैन सिद्दीकी ने युवाओं और किसानों के बजट में नौकरी सृजन (Job Creation) को लेकर कोई स्पष्ट ‘रोड मैप’ नहीं है। करोड़ों शिक्षित युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, लेकिन सरकार के पास उनके लिए कोई ठोस नीति नहीं है,अन्नदाता के लिए बजट में कोई बड़े उपाय नहीं किए गए हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से ही बदहाली के कगार पर है, और इस बजट ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है।
“कॉरपोरेट की सरकार, पूंजीपतियों का बजट”
सपा नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2026 का खाका केवल बड़े पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुँचाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश की वास्तविक समस्याएं जैसे महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण बदहाली चरम पर हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार केवल बड़े घरानों की तिजोरियां भरने में लगी है।
महंगाई पर नियंत्रण में विफल रही सरकार
सिद्दीकी ने आगे कहा कि आम आदमी की रसोई से लेकर दैनिक जीवन तक महंगाई आग लगा रही है, लेकिन बजट में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी रणनीति नजर नहीं आती। उन्होंने इस बजट को “जनता को गुमराह करने वाला सपनों का पुलिंदा” बताते हुए कहा कि यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे गर्त में ले जाने वाला है।









