इटावा। सर्दी की सुबह जब कोहरा छाया हुआ था, तभी NH-19 ओवर ब्रिज के नीचे एक 4 फीट लंबा अजगर दिखने से राहगीर सहम गए। मॉर्निंग वॉक पर निकले गगनदीप की नजर जैसे ही इस अजगर पर पड़ी, उन्होंने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 पर मदद मांगी। पुलिस ने तुरंत सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी से संपर्क करने को कहा और इस तरह शुरू हुआ इस निरीह जीव की सुरक्षा का सफर।
कोहरे में पहुंचे डॉ आशीष, किया सुरक्षित बचाव
डॉ आशीष त्रिपाठी ने तुरंत स्नेकबाइट हेल्पलाइन पर मिली सूचना पर कोहरे में ही मौके पर पहुंचकर अजगर का सावधानीपूर्वक रेस्क्यू किया और उसे सामाजिक वानिकी विभाग के दिशा-निर्देशन में सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। यह अजगर पायथन मोलूरस प्रजाति का था, जो पूर्णतः विषहीन है।
सर्दी में सांपों के लिए बढ़ जाती है मुश्किलें
डॉ आशीष ने बताया कि इस समय सर्दी के गिरते तापमान में सांपों का खून तेजी से जमने लगता है, जिससे वे जीवन-मृत्यु के संघर्ष में होते हैं और गर्म जगह की तलाश में अक्सर मानव आवास के आसपास आ जाते हैं।
डॉ आशीष ने दी महत्वपूर्ण जानकारी और सलाह
मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए डॉ आशीष ने कई जरूरी बातें बताईं:
1. सर्पदंश का सुरक्षित इलाज कहाँ कराएँ?
· जिला अस्पताल इटावा के इमरजेंसी वार्ड, कमरा नंबर 3 में।
· सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी में।
2. सर्पदंश की पुष्टि कैसे करें?
निःशुल्क स्नेकबाइट हेल्पलाइन 7017204213 पर काटे गए निशान की फोटो भेजकर तुरंत पुष्टि की जा सकती है कि सांप विषधारी है या नहीं।
3. सर्पदंश से कैसे बचें?
· रात में सोने से पहले दरवाजों के नीचे कपड़ा या बोरी लगाएँ।
· बिस्तर और तकिया चेक करके सोएँ।
· अंधेरे में बाहर रखे जूते-चप्पल हिलाकर देखें पहनें।
· जरूरी हो तभी रात में घर से निकलें।
जागरूकता से आया बड़ा बदलाव
डॉ आशीष और संस्था ओशन के अथक प्रयासों से जनपद में एक सराहनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। अब लोग वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने के बजाय सुरक्षित बचाव की मदद लेते हैं और सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक में न पड़कर सीधे अस्पताल पहुँचते हैं। इससे न केवल मानव जीवन सुरक्षित हो रहा है, बल्कि वन्य जीव संरक्षण को भी बल मिल रहा है।











