इटावा, 03 दिसंबर। इटावा सफारी पार्क के वन्यजीव चिकित्सकों और कर्मियों की सतर्कता व सूझबूझ ने एक घायल सांभर और एक तेंदुए के शावक को नया जीवन दिया है। हाल ही में बचाए गए दोनों जीव अब पार्क में बेहतर देखभाल और उपचार के बाद स्वस्थ हो रहे हैं।
सांभर को मिली समय पर मदद:
दिनांक 02 दिसंबर,2025 की देर शाम को एटा वन प्रभाग के अलीगंज रेंज के ग्राम चिचौली से एक गंभीर रूप से घायल नर सांभर को बचाया गया। जानवर के शरीर पर कई स्थानों पर गहरे घाव थे। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर उसे बेहतर इलाज के लिए इटावा सफारी पार्क लाया गया।
पार्क के वन्यजीव चिकित्सकों ने तुरंत उसका उपचार शुरू कर दिया और उसे हिरण सफारी में बने क्वारंटाइन हाउस में रखा गया। कीपर सुधीर कुमार ने सांभर को सावधानीपूर्वक वाहन से उतारने और क्वारंटाइन हाउस तक पहुंचाने में विशेष सूझबूझ का परिचय दिया। पिछले शरीर और मुंह के पास घाव होने के बावजूद सांभर का स्वभाव सामान्य है और वह हरा चारा खा रहा है। घाव भरने और क्वारंटाइन अवधि पूरी होने तक उस पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, उसके बाद उसे सफारी पार्क में छोड़ने पर विचार किया जाएगा।
तेंदुए के शावक की कहानी: सफल बचाव और स्वास्थ्यलाभ:
इसीतरह, दिनांक 25 नवंबर, 2025 को शाहजहाँपुर वन प्रभाग के खुटार रेंज के सौफरी ग्राम से एक तेंदुए के शावक को बचाया गया था। यह शावक एक गहरे कुएं में गिर गया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर उसे भी इटावा सफारी पार्क लाया गया, जहां आने पर उसके शरीर पर चोट के निशान थे।
लगभग 8 माह के इस तेंदुए के शावक को पार्क में उपचार और देखभाल दी गई। अब उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और शावक पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है तथा सामान्य रूप से अपना पूरा आहार ले रहा है। इस शावक के आने से सफारी पार्क में तेंदुओं की कुल संख्या अब 24 हो गई है।
इन दोनों सफल बचाव कार्यों से इटावा सफारी पार्क के कर्मचारियों की वन्यजीवों के प्रति प्रतिबद्धता और उनकी सूझबूझ का परिचय मिलता है। यह घटनाएं समय पर हस्तक्षेप और उचित चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को रेखांकित करती हैं।
(डॉ. विनय कुमार सिंह)
उप निदेशक,
इटावा सफारी पार्क, इटावा









