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October 31, 2026 9:17 pm

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जिलाधिकारी ने PET-2026 परीक्षा केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, नकलविहीन एवं सकुशल परीक्षा के दिए सख्त निर्देश इटावा, 30 अक्टूबर 2026 — उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2026 के दृष्टिगत जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने जनपद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राजकीय इंटर कॉलेज, इटावा तथा जन सहयोगी बालिका इंटर कॉलेज, बसरेहर एवं मनभावती कुंवरी जन सहयोगी इंटर कॉलेज, बसरेहर में पहुंचकर परीक्षा संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों एवं केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिए कि परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नकलविहीन ढंग से संपन्न कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न होने दी जाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, अनुशासन एवं निगरानी बनाए रखने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा की सुचिता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा अवधि के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोकने के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी एवं तत्परता के साथ करें, ताकि PET-2026 की परीक्षा जनपद में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

उज्बेकिस्तान की महिला को बेटी के साथ देश वापसी की मिली इजाजत,याचिकाकर्ता के सामने रखी कई शर्तें

नई दिल्ली।पटियाला हाउस सेशन कोर्ट ने एक अहम फैसले में उज्बेकिस्तान की नागरिक मखबूबा रहमानोवा को अपनी नाबालिग बेटी के साथ तीन हफ्ते के लिए अपने देश लौटने की सशर्त अनुमति दे दी है।कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए यह फैसला सुनाया।

 

कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने याचिका खारिज करते समय न तो मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और न ही पहले के आचरण का उचित मूल्यांकन किया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अतुल अहलावत ने कहा कि 12 साल की बच्ची को अकेले अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब वह अपनी मातृभाषा में ही संवाद कर सकती है।

 

कोर्ट ने कहा कि बच्ची की शिक्षा और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,भले ही वह विदेशी नागरिक ही क्यों न हो।कोर्ट ने सशर्त अनुमति देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को एक लाख की सावधि जमा रसीद (एफडीआर) और एक लाख रुपये की जमानत देनी होगी।साथ ही यात्रा की तारीख,टिकट, वीजा और विदेश में रहने का पता कोर्ट में जमा कराना होगा।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि मखबूबा को विदेश से लौटने के 22वें दिन अनिवार्य रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।अगर वह तय अवधि में वापस नहीं लौटती हैं तो उनकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता मेडिकल या अन्य आधार पर विदेश में रहने के लिए समय बढ़ाने की मांग नहीं कर सकता।

 

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पासपोर्ट की रंगीन कॉपी रखने के बाद मूल पासपोर्ट याचिकाकर्ता को सौंप दिया जाए और आदेश की एक कॉपी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाए।

 

बता दें कि मखबूबा रहमानोवा साल 2022 में दर्ज एक आपराधिक मामले में मुकदमे का सामना कर रही हैं।उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर अनुमति मांगी थी कि वह अपनी 21 वर्षीय बेटी समीरा रहमानोवा को वापस उज्बेकिस्तान ले जाना चाहती हैं और उसका स्कूल में दाखिला करवाना चाहती हैं,क्योंकि उनकी बेटी का भारत का वीजा 21 अगस्त 2025 को समाप्त हो रहा है।

 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मखबूबा को पहले भी यात्रा की अनुमति दी गई थी और उन्होंने निर्धारित अवधि के भीतर भारत लौटकर अदालत का भरोसा नहीं तोड़ा है। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने पहले दी गई छूट का दुरुपयोग नहीं किया और समय पर भारत लौट आई थी।

 

मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति जताई और तर्क दिया कि यह याचिका अस्थायी आदेश के खिलाफ दायर की गई है और मखबूबा देश छोड़कर भाग सकती हैं।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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