इटावा सेवा और कर्तव्य का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के स्वभाव और नैतिकता पर निर्भर करता है। इस बात को चरितार्थ कर रहे हैं जिला अस्पताल के पूर्व एक्सरे टेक्नीशियन अमरजीत सिंह। विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका अपने कार्य के प्रति समर्पण और मरीजों के प्रति सेवा भाव कम नहीं हुआ है। यही कारण है कि आज भी जब अस्पताल में मरीजों के हित में किसी अनुभवी और योग्य हाथ की जरूरत होती है, तो प्रशासन अमरजीत सिंह की कुशलता पर भरोसा जताता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. परितोष शुक्ला अमरजीत सिंह की कार्यक्षमता और उनके लंबे अनुभव को देखते हुए समय-समय पर मरीजों की सहायता के लिए उन्हें आमंत्रित करते हैं। यह डॉ. शुक्ला के निजी व्यवहार और अमरजीत सिंह के सेवा के प्रति जुनून का ही परिणाम है कि एक पूर्व कर्मचारी आज भी अस्पताल परिसर में अपनी नि:स्वार्थ सेवाएं दे रहा है। अक्सर देखा जाता है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह किनारा कर लेते हैं, लेकिन अमरजीत सिंह ने इस धारणा को बदलते हुए यह सिद्ध किया है कि मानवता की सेवा के लिए पद पर होना अनिवार्य नहीं है।
अपने इस सेवा कार्य पर अमरजीत सिंह का कहना है कि डॉक्टरी पेशा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि व्यक्ति भले ही कागजों में रिटायर हो जाए, लेकिन अपने कर्तव्य और हुनर से उसे कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से वह इन सेवाओं के बदले किसी भी प्रकार की धनराशि या आर्थिक लाभ नहीं लेते हैं। उनकी यह पहल न केवल अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है, बल्कि विभाग के अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।











