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March 2, 2026 1:15 am

जलीय वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद: इटावा सफारी में छह दिवसीय प्रशिक्षण स्कूल संपन्न 9वां जलीय वन्यजीव जीवविज्ञान एवं संरक्षण स्कूल: जहां सिद्धांत नहीं, व्यवहार सिखाया गया

इटावा, 28 फरवरी 2026: नदियों, आर्द्रभूमियों और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए समर्पित युवाओं की एक नई टोही तैयार हुई है। इटावा सफारी पार्क में 23 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें जलीय वन्यजीव जीवविज्ञान एवं संरक्षण स्कूल ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की।

झलकियां: जब चंबल की धारा बनी क्लासरूम

 इटावा सफारी पार्क कब: 23-28 फरवरी 2026

सहभागी: इटावा सफारी पार्क ✕ टीएसए फाउंडेशन इंडिया सहयोग: टाटा केमिकल्स सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट

प्रतिभागी: 6 राज्यों + नेपाल से 15 चुनिंदा युवा

विशेषज्ञ: 21 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स

“कम लेक्चर, ज्यादा फील्ड वर्क” – अनोखी ट्रेनिंग का मंत्र

इस बार के स्कूल की सबसे खास बात रही हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग। प्रतिभागियों ने चंबल नदी पर जाकर घड़ियाल गिने, पक्षियों की पहचान की, और ड्रैगनफ्लाई के जरिए मीठे पानी की सेहत परखी। यह स्कूल सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर उतरकर सीखने का अनुभव दिया।

शुभारंभ: संरक्षण की अलख

कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. अनिल कुमार पटेल (निदेशक, इटावा सफारी पार्क) ने किया। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी श्री विकास नायक और उप वन संरक्षक सुश्री चांदनी सिंह ने नदियों और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए प्रशिक्षित युवाओं की अहमियत पर जोर दिया।

पक्षी से घड़ियाल तक: हर जलीय जीव पर विशेष सत्र

 

पक्षी एवं आर्द्रभूमि संरक्षण

 

· डॉ. असद रहमानी (प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ) ने पक्षियों की पहचान और संरक्षण पर फील्ड अभ्यास कराया।

· धीरेंद्र सिंह ने ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई (ओडोनेटा) के माध्यम से मीठे पानी के स्वास्थ्य की पहचान सिखाई।

· तरुण नायर ने वैज्ञानिक तरीके से घड़ियाल गिनने की विधि समझाई, जिसका प्रतिभागियों ने चंबल नदी सफारी के दौरान अभ्यास किया।

 

इको-टूरिज्म और स्थानीय सहभागिता

 

· आर.पी. सिंह (मेला कोठी लॉज) ने सतत इको-टूरिज्म और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर चर्चा की।

इटावा लायन सफारी का भ्रमण: वन्यजीव प्रबंधन की पाठशाला

प्रतिभागियों ने इटावा लायन सफारी का दौरा किया और बाड़ा डिजाइन, रेस्क्यू व्यवस्था और वन्यजीव प्रबंधन की बारीकियां सीखीं।

गंगा डॉल्फिन और जेनेटिक अध्ययन पर विशेष फोकस

· संदीप बेहरा (राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन) ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण और गंगा पुनर्जीवन कार्यक्रम पर प्रकाश डाला।

· आर.के. शर्मा ने जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन पर सत्र लिया।

· प्रो. संत प्रकाश ने जलीय वन्यजीव संरक्षण में जेनेटिक अध्ययन की भूमिका समझाई।

फोटोग्राफी से लेकर ग्रांट लेखन तक: प्रतिभागियों ने निखारे हुनर

· राघव गुप्ता (IRS, वन्यजीव फोटोग्राफर) ने फोटोग्राफी एथिक्स और संरक्षण स्टोरीटेलिंग पर सत्र लिया।

· ग्रांट लेखन, फिल्म निर्माण और सुविधा डिजाइन जैसे समूह कार्यों में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

· सुविधा डिजाइन: टर्टल समूह विजेता

· फिल्म निर्माण: घड़ियाल समूह प्रथम

· ग्रांट लेखन: ऊदबिलाव समूह विजेता

· सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी: डॉ. मीनाक्षी रेड्डी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

कार्यक्रम के समापन पर मलेशिया के प्रसिद्ध सरीसृप विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनील दास ने विशेष व्याख्यान दिया, जो प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक रहा।

आयोजन में इनकी रही अहम भूमिका

· डॉ. अनिल कुमार पटेल (निदेशक, इटावा सफारी पार्क)

· डॉ. शैलेंद्र सिंह (निदेशक, टीएसए फाउंडेशन इंडिया)

· श्रीपर्णा दत्ता

· लॉजिस्टिक सहयोग: श्री रूपेश श्रीवास्तव, श्री शशांक, श्री पवन पारिक

एक नेटवर्क जो बचाएगा भारत की नदियां

यह 9वां जलीय वन्यजीव स्कूल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि नदियों और जलीय जैव विविधता की सुरक्षा के लिए समर्पित युवाओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

“यहां आकर हमने महसूस किया कि संरक्षण सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं, बल्कि नदियां भी हमारी धरोहर हैं। इटावा सफारी ने हमें जमीन पर सीखने का मौका दिया।”

— डॉ. मीनाक्षी रेड्डी (सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी)

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Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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