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February 14, 2026 7:45 pm

आखिरी सांस तक सपा के सिपाही रहे राधेश्याम यादव,मरने से पहले कपड़े पर लिख दी थी अपनी आखिरी सियासी वसीयत

भोगांव,मैनपुरी।समाजवाद के गढ़ मैनपुरी से वफादारी और वैचारिक अटूटता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है,जिसे देखकर हर कोई अचंभित है।भोगांव क्षेत्र के महोली खेड़ा के रहने वाले समाजवादी पार्टी के पुराने सिपाही राधेश्याम यादव अब इस दुनिया में नहीं रहे,लेकिन अपनी अंतिम विदाई को लेकर उन्होंने जो इच्छा जताई थी,उसने मैनपुरी जिले में उनकी चर्चा छेड़ दी है।

राधेश्याम यादव पार्टी से इस कदर जुड़े थे कि उन्होंने अपनी मृत्यु से काफी समय पहले ही एक सफेद कपड़े पर अपनी अंतिम वसीयत लिख दी थी।उन्होंने अपने हाथों से लिखा था कि अंतिम यात्रा का प्रयास हो,कोई भी सीजन हो एक लाल टोपी तथा पार्टी के झंडे को शव के ऊपर डालकर यात्रा निकालनी चाहिए।हैरानी की बात यह है कि राधेश्याम यादव ने इस कपड़े पर 7 जून 2024 (शुक्रवार) की तारीख के साथ बाकायदा हस्ताक्षर भी किए थे,जैसे कोई कानूनी दस्तावेज तैयार किया गया हो।

 

राधेश्याम यादव के निधन के बाद परिजनों ने उनकी इस आखिरी इच्छा को आदेश की तरह माना।उनके पार्थिव शरीर को सपा के झंडे में लपेटा गया और सिर पर वह लाल टोपी सजाई गई,जिसे पहनकर उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया था।

 

राधेश्याम यादव के भांजे प्रदीप यादव ने बताया कि मामा जी सपा की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े रहे और अंतिम सांस तक उनकी निष्ठा नहीं डगमगाई।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के दौर के कार्यकर्ता इसी तरह के जुनून के लिए जाने जाते हैं। राधेश्याम यादव ने यह साबित कर दिया कि उनके लिए समाजवादी झंडा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि उनका कफन और उनकी पहचान थी।महोली खेड़ा गांव में जब राधेश्याम की अंतिम यात्रा निकली तो देखने वालों की आंखें नम थीं।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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