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February 15, 2026 2:32 am

लखनऊ पुलिस ने खोज निकाला 10 लाख का दुलदुल घोड़ा, जानें कहां मिला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के तालकटोरा करबला से चोरी हुआ अशर नाम का दुलदुल घोड़ा मिल गया है। तालकटोरा पुलिस ने घोड़ा चोरी करने वाले और घोड़ा खरीदने वाले को गिरफ्तार कर लिया है।ईरानी नस्ल के घोड़े की कीमत लगभग दस लाख है।दुलदुल घोड़ा तलाश कर लाने वाले को पचास हजार का इनाम देने का ऐलान भी किया गया था।घोड़े की खोज में पुलिस के कई टीम लगी थीं। अब घोड़े को तालकटोरा थाने लाया गया है। दुलदुल की देखभाल करने वाले पाशा की आंखों में आंसू हैं।

 

दुलदुल का सिया समुदाय के लिए है धार्मिक महत्व

 

चोरी हुआ दुलदुल कीमती तो है ही,लेकिन इस घोड़े का शिया समुदाय के लिए धार्मिक महत्व है।माना जाता है कि लगभग 1400 साल पहले कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन का दुलदुल जुलजनाह भी शहीद हुआ था। मुहर्रम और चेहल्लुम के जुलूस में चोरी हुआ दुलदुल प्रतीक के तौर पर आगे आगे चलता है। लोग इस दुलदुल की सवारी नहीं करते, पूरे रास्ते लोग दुलदुल को हाथ से छूते हैं, चूमते हैं ।

 

900 सीसीटीवी फुटेज देख खोज निकाला दुलदुल

 

तालकटोरा थाना क्षेत्र राजाजीपुरम के खुदाबख्श कर्बला परिसर से 24 दिसंबर को घोड़ा चोरी किया गया था। कर्बला में अशर नाम के इस दुलदुल के लिए दुलदुल हाउस बना है।चोर दुलदुल हाउस का ताला तोड़कर दुलदुल को ले गए थे।चोर दुलदुल को आशियाना पुल की तरफ ले गए थे।पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई,जिसमें एक लड़का दुलदुल की लगाम पकड़े ले जाते दिख रहा है।पुलिस ने मामला दर्ज कर घोड़े की तलाश में जुट गई। तालकटोरा कर्बला के आसपास के रास्तो में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई।पुलिस ने लगभग सौ सीसीटीवी की फुटेज देखी और घोड़े को उन्नाव से बरामद किया।घोड़ा वापस मिलने से इसके असली मालिक बेहद खुश हैं।

 

ईरानी नस्ल का यह घोड़ा है बेहद खास

 

ईरानी नस्ल का यह घोड़ा बेहद खास है।पूरे लखनऊ में सिर्फ 2-3 घोड़े ही इस तरह के हैं। इसे लगभग 1.5 साल पहले उत्तराखंड से 4-4.5 लाख रुपये में खरीदा गया था। इसे पालने का मासिक खर्च लगभग 30 हजार रुपये है।

 

मुहर्रम के जुलूस में शामिल होता है घोड़ा

 

इस दुलदुल घोड़े का शिया समुदाय के लिए धार्मिक महत्व है और ये मुहर्रम के जुलूस में सबसे आगे चलता है।यह घोड़ा शिया समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। मुहर्रम और चेहल्लुम जुलूसों में इस घोड़े का इस्तेमाल होता है।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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