बरेली।उत्तर प्रदेश बरेली में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर)ने 40 साल पुराने बिछड़े रिश्ते को फिर से जोड़ दिया है।दिल्ली में सलीम नाम से नई पहचान के साथ जिंदगी बिता रहे 55 वर्षीय ओम प्रकाश को जब एसआईआर सर्वे के दौरान अपने दस्तावेज़ न मिलने की परेशानी सामने आई, तो सालों 40 साल बाद वह अपने पुश्तैनी गांव लौट आए।अचानक घर वापसी ने पूरे गांव को भावुक कर दिया और ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और जुलूस के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
बरेली के शाही थाना क्षेत्र के काशीपुर के रहने वाले ओम प्रकाश आखिरकार अपने घर वापस लौट आए। ओमप्रकाश केवल 15 साल की उम्र में घर से नाराज़ होकर चले गए थे। सालों बीतने के बाद उनके घर न लौटने पर गांव में उनकी मौत की चर्चाएं होने लगीं और परिवार ने भी यही मान लिया था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस बीच उनके पिता का भी देहांत हो गया था। फिलहाल उनके आने से क्षेत्र में चर्चा बना हुआ है।
शुक्रवार को ओम प्रकाश अपनी बड़ी बहन चंद्रकली और अपने 15 साल बेटे जुम्मन के साथ काशीपुर पहुंचे। ग्रामीणों ने दोनों का पूरे गांव में घुमाकर स्वागत किया। ग्रामीण तब हैरान रह गए जब ओम प्रकाश ने बताया कि अब उनका नाम सलीम पुत्र ताहिर हुसैन निवासी उस्मानपुर, दिल्ली है। बता दें कि दिल्ली में एसआईआर अभियान चल रहा है। फॉर्म भरने के दौरान माता-पिता की आईडी न मिलने पर उन्हें सच्चाई बताकर गांव लौटना पड़ा।
ओम प्रकाश ने बताया कि घर से निकलने के बाद वह कुछ समय बरेली में मजदूरी करते रहे, फिर दिल्ली चले गए। वहां कोई आईडी प्रूफ न होने पर मोहल्ले के लोगों ने उनका नया नाम और पता दर्ज कराकर वोटर आईडी बनवाई। इसी बीच उनका निकाह मोहल्ले की शाहबानो से हुआ, जिससे उनकी चार बेटियां-रुखसाना, रुखसार, रूपा, कुप्पा-और एक बेटा जुम्मन है। तीन बेटियां शादीशुदा हैं।
40 साल बाद ओम प्रकाश को देखकर छोटा भाई रोशनलाल, भतीजा कुंवरसेन, वीरपाल, ग्राम प्रधान वीरेंद्र राजपूत सहित ग्रामीण भावुक हो उठे। ग्रामीणों ने उन्हें और जुम्मन को मंदिर ले जाकर स्नान करवा कर दोबारा से सनातन धर्म में घर वापसी करवाई। ओमप्रकाश को मालाएं पहनाईं और भोज का आयोजन किया।
ओमप्रकाश उर्फ सलीम ने बताया कि अब वे परिवार संग अपने पुश्तैनी गांव काशीपुर में ही बसना चाहते हैं और सारी पहचान पत्र भी गांव से ही बनवाएंगे।ओमप्रकाश ने कहा कि 40 साल पहले सभी मकान मिट्टी के थे,रास्ता भी नहीं था,लेकिन अब गांव में विकास हो चुका है।कहा कि वह हिंदू धर्म अपनाकर गांव में ही परिवार के साथ रहेगा,क्योंकि यहां वापस लौटकर खुशी मिल रही है।









