बेसिक शिक्षा में गुणवत्ता के नाम पर टेट अनिवार्यता को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय पर सम्पूर्ण देश का शिक्षक सड़कों पर विरोध दर्ज कर रहा है।
एक तरफ नई शिक्षा नीति लागू होने के पश्चात सभी शिक्षक भर्तियों में सन 2011 के पश्चात टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट(टेट) पास किये हुए अभ्यर्थी ही नौकरी पाने के हकदार थे। बाद में टेट के साथ सुपर टेट भी पास करना अनिवार्य हो गया।
पर अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में उन तमाम शिक्षकों के लिए भी टेट अनिवार्य कर दिया जो 2011 से पहले नियुक्ति पाये थे।
इस मामले पर तमाम शिक्षक संगठनों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया और कहा कि यह निर्णय बिल्कुल भी मान्य नहीं है क्योंकि पूर्व में जब शिक्षक भर्ती हुए थे तो यह नियम लागू नहीं था। साथ ही जो भी उस समय भर्ती नियम लागू थे उनकी अहर्ता पूर्ण करने पर ही सभी ने नियुक्ति प्राप्त की। अब उम्र व नौकरी के आखिरी पड़ाव पर आकर यह कह देना कि आप शिक्षा प्रदान करने योग्य नहीं हैं ये तार्किक नहीं है। इस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय को पुनः विचार करना चाहिए।
इसी क्रम में आज अटेवा पुरानी पेंशन बहाली मंच का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष अजय कुमार यादव की अगुआई में सांसद इटावा माननीय जितेंद्र कुमार दोहरे जी से मिला एवं अपना ज्ञापन सौंपा।
सांसद ने सभी को आश्वस्त किया कि ऐसे अनुचित निर्णय के खलाफ वो स्वयं भी हैं और राष्ट्रीय शिक्षा समिति का सदस्य होने के नाते वो शिक्षकों की बात समिति तथा सदन तक हर हाल में पहुंचाने का काम करेंगे। पूर्व में भी उन्होंने शिक्षक कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की माँग को पटल पर रखा था साथ ही विभागों में लगातार बढ़ रहे निजीकरण का भी मामला संज्ञान में लाये हैं।
प्रतिनिधिमंडल में डॉ लवकुश जाटवानी, राजेश जादौन, रईस अहमद, विपिन कुमार धनगर, हरेंद्र, शैलेन्द्र,तपन,अरुण यादव, बृजेन्द्र,मनोज शर्मा, राजेश यादव प्रवक्ता, शिवरतन कठेरिया,रघुवीर, मुनीश, दिलीप अहेरिया, अतुल यादव, यतेंद्र, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद कासिफ,राघवेंद्र आदि शामिल रहे।









