इटावा, 29 जुलाई 2025: दिल्ली के मौलाना साजिद रशीद द्वारा सपा सांसद डिम्पल यादव के मस्जिद में पहनावे पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को एच०एम०एस० इस्लामिया इंटर कॉलेज के प्रबंधक और वरिष्ठ समाजसेवी मुहम्मद अलताफ ने “धर्म और संस्कृति के विरुद्ध” बताते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह बयान न सिर्फ़ स्तरहीन है, बल्कि इस्लामिक मूल्यों को भी तोड़ता है, जहाँ पैगंबर मोहम्मद ने सभी धर्मों के लोगों को मस्जिद में आमंत्रित किया था।
“मीटिंग नहीं, इमाम का निमंत्रण था”
अलताफ ने स्पष्ट किया कि डिम्पल यादव और अखिलेश यादव रामपुर के सांसद-इमाम के आमंत्रण पर मस्जिद गए थे, न कि किसी राजनीतिक बैठक के लिए। उन्होंने मौलाना के बयान को “जानबूझकर गुमराह करने वाला” बताया और कहा कि ऐसे विवादों से मुस्लिम समुदाय की छवि खराब होती है।
“साड़ी पर टिप्पणी? बचकाना व्यवहार!”
अलताफ ने जोर देकर कहा कि डिम्पल यादव ने पारंपरिक साड़ी पहनी थी, जो भारतीय संस्कृति की शालीनता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “इस्लाम सिखाता है कि दूसरों की कमियों को उजागर करने के बजाय, उन्हें सम्मान दो। डिम्पल यादव एक गरिमामयी नेता हैं, जिन पर यह टिप्पणी पूरे मुस्लिम समाज को शर्मसार करती है।”
“मौलानाओं का राजनीतिक एजेंडा सामने आया”
अलताफ ने आरोप लगाया कि मौलाना साजिद रशीद और बरेली के एक अन्ने मौलाना किसी खास पार्टी के एजेंडे के तहत ऐसी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री से रामपुर के सांसद-इमाम को हटाने की माँग को भी “असंवैधानिक और सांप्रदायिक” बताया।
अपील: “माफी माँगें मौलाना!”
अलताफ ने मौलाना साजिद से अपने बयान वापस लेने की अपील करते हुए कहा, “यह उनकी खुद की इज़्ज़त और मुस्लिम समुदाय की एकता के लिए ज़रूरी है। टीवी डिबेट्स में मुसलमानों को बदनाम करने वाले ऐसे लोगों से सावधान रहने की ज़रूरत है।”
—
मुहम्मद अलताफ, प्रबंधक, एच०एम०एस० इस्लामिया इंटर कॉलेज, इटावा
—
#धर्म_की_राह_में_मुहब्बत_है_फ़ितना_नहीं
#डिम्पल_यादव_सम्मान_माँगती_है









