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October 30, 2026 8:36 pm

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जिलाधिकारी ने PET-2026 परीक्षा केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, नकलविहीन एवं सकुशल परीक्षा के दिए सख्त निर्देश इटावा, 30 अक्टूबर 2026 — उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2026 के दृष्टिगत जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने जनपद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राजकीय इंटर कॉलेज, इटावा तथा जन सहयोगी बालिका इंटर कॉलेज, बसरेहर एवं मनभावती कुंवरी जन सहयोगी इंटर कॉलेज, बसरेहर में पहुंचकर परीक्षा संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अभ्यर्थियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों एवं केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिए कि परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नकलविहीन ढंग से संपन्न कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न होने दी जाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, अनुशासन एवं निगरानी बनाए रखने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा की सुचिता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा अवधि के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोकने के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी एवं तत्परता के साथ करें, ताकि PET-2026 की परीक्षा जनपद में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

पुलिस ने बनाया दिया रस्सी का सांप,रामवीर की जगह राजवीर को भेजा जेल,बेगुनाह साबित करने में लगे 17 साल

मैनपुरी।उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है।पुलिस की वजह से एक निर्दोष गुनहगारों की सूची में शामिल हो गया। उसे खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए 17 साल कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े।

अब कोर्ट ने 62 वर्षीय राजवीर को कोतवाली में गिरोहबंद अधिनियम के तहत दर्ज मामले में 24 जुलाई को आरोपमुक्त कर दिया है।

 

राजवीर समेत ये लोग भेजे गए जेल

 

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने 31 अगस्त 2008 को नगला भांट गांव निवासी राजवीर,मनोज यादव,प्रवेश यादव और भोला के खिलाफ गिरोहबंद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने राजवीर समेत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में मामले की जांच दन्नाहार पुलिस को सौंप दी गई थी।

 

पुलिस ने रामवीर की जगह दर्ज किया राजवीर का नाम

 

इस मामले में असली आरोपी राजवीर का भाई रामवीर था,लेकिन पुलिस ने रामवीर‌की जगह राजवीर का नाम दर्ज कर दिया था।राजवीर के वकील विनोद कुमार यादव ने कहा कि मेरा मुवक्किल बार-बार दलील देता रहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। उसे गिरफ्तार किया गया,ज़मानत मिलने से पहले 22 दिन जेल में रखा गया और फिर उसे अकेले ही व्यवस्था से लड़ने के लिए छोड़ दिया गया।

 

22 दिन जेल रहने के बाद कोर्ट-कचहरी के चक्कर

 

वकील विनोद कुमार यादव के मुताबिक 22 दिन जेल में बिताने के बाद राजवीर को ज़मानत तो मिल गई, लेकिन उसे सच्चाई सामने लाने के लिए मैनपुरी से लेकर आगरा (जहां 2012 में मामला स्थानांतरित कर दिया गया) तक, कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े।

 

खेतिहर मजदूरी का काम करता है राजवीर

 

वकील विनोद कुमार ने कहा कि इन सालों में राजवीर ने लगभग 300 अदालती सुनवाइयों में हिस्सा लिया।राजवीर अपने परिवार पर मुश्किल से ध्यान दे पाता था। उस पर अपनी दो बेटियों,जिनमें से एक दिव्यांग है की शादी की जिम्मेदारी थी। उसके बेटे गौरव को स्कूल छोड़ना पड़ा और अब वह खेतिहर मजदूर के रूप में काम करता है।

 

पुलिस की गलती की से झेलनी पड़ी मुसीबतें

 

विनोद कुमार ने कहा कि राजवीर को ये दुश्वारियां अपनी वजह से नहीं, बल्कि पुलिस की गलती की वजह से झेलनी पड़ीं।राजवीर को आखिरकार 24 जुलाई को राहत मिली, जब विशेष न्यायाधीश स्वप्न दीप सिंघल ने उसे आरोपमुक्त करते हुए एक कठोर आदेश पारित किया।

 

17 साल झूठे मुकदमे का सामना करना पड़ा

 

कोर्ट ने कहा कि पुलिस और अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को 22 दिन जेल में बिताने पड़े और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए 17 साल तक अदालत में झूठे मुकदमे का सामना करना पड़ा।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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