इटावा। ऐतिहासिक कालीवाहन मंदिर सिद्ध पीठ के विकास, सुंदरीकरण और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा के लिए पूर्व चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू और अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने आज मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
कालीवाहन मंदिर को देश के प्रमुख सिद्ध पीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती की बांह गिरी थी, जिसके बाद इस स्थान का नाम *कालीबांह* (बाद में कालीवाहन) पड़ा. मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के विग्रह स्थापित हैं, जो भक्तों की आस्था का केंद्र हैं।
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
1. सुंदरीकरण: मंदिर परिसर की सौंदर्यिक व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के लिए नए लैंडस्केपिंग और प्रकाश व्यवस्था पर जोर दिया गया।
2. सफाई व्यवस्था: स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए अतिरिक्त सफाई कर्मियों की तैनाती और कचरा निस्तारण प्रणाली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
3. भक्त सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए बेहतर पानी, शौचालय और बैठने की व्यवस्था करने पर चर्चा हुई।
4. सुरक्षा उपाय: भीड़ प्रबंधन और सीसीटीवी कैमरों की समीक्षा की गई.
अधिकारियों का संकल्प
पूर्व चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटू ने कहा कि यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इटावा की पहचान भी है। हम इसके विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
EO विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने कार्यों की समयसीमा पूर्ति पर जोर देते हुए कहा कि शीघ्र ही मंदिर परिसर को विश्वस्तरीय स्वरूप दिया जाएगा।
समापन इस निरीक्षण से मंदिर के जीर्णोद्धार और भक्तों की सुविधाओं में गुणात्मक सुधार की उम्मीद जागी है। आगामी योजनाओं पर शीघ्र ही अमल









