Explore

Search

February 15, 2026 11:02 am

अवैधानिक ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की बीड खोलने के खिलाफ बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा: आन्दोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान  

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण की अवैधानिक प्रक्रियाओं के विरोध में किसी भी समय आन्दोलन शुरू करने की चेतावनी दी।

 

15 मार्च 2025, लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह अवैधानिक करार दिया है। समिति ने सभी बिजली कर्मियों से निजीकरण की अवैधानिक प्रक्रियाओं के विरोध में किसी भी समय आन्दोलन शुरू करने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

 

समिति के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने सभी सीमाओं का उल्लंघन करते हुए बीड खोली है, जिससे पूरे प्रदेश में बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है। संयुक्त संघर्ष समिति इटावा के संयोजक विवेक कुमार सिंह, सह-संयोजक आनंद पाल, अभियंता संघ सचिव गगन अग्निहोत्री, राहुल कुमार, पीयूष मौर्य, वीरेंद्र बाबू, राम जी, मदन यादव और अन्य ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय में विरोध सभा आयोजित की।

 

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से की अपील

संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के नाम पर हो रहे मेगा घोटाले को रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करें। समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है और वे उनके मार्गदर्शन में सुधार के कार्य में लगे हैं, लेकिन पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण का राग छेड़कर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति पैदा कर दी है।

 

हितों के टकराव का मामला

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए ऐसी कंपनियों से बीड ली है, जो बड़ी बिजली कंपनियों के साथ काम कर रही हैं। इनमें से एक कंपनी उत्तर प्रदेश सरकार की एक ट्रिलियन योजना में भी शामिल है। समिति ने कहा कि यदि यह सच है, तो यह मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के सर्वथा विपरीत है।

 

परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं किया है। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 के अनुसार, सरकारी निगम की परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र को सौंपने से पहले उनका मूल्यांकन करना अनिवार्य है। समिति ने कहा कि परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किए बिना आरएफपी दस्तावेज़ में परिसंपत्तियों की रिजर्व प्राइस 1500-1600 करोड़ रुपए रखना सरकारी संपत्ति की खुली छूट है।

 

प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

संघर्ष समिति के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं ने प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के विरोध में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए रैली निकाली। वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में भी विरोध प्रदर्शन हुए।

 

17 मार्च को और बड़ा विरोध

संघर्ष समिति ने कहा कि अवकाश के बाद 17 मार्च को सभी जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। समिति ने सभी बिजली कर्मियों से एकजुट होकर इस अवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है।

 

विवेक कुमार सिंह

संयोजक, संयुक्त संघर्ष समिति, इटावा

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

Live Tv
विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर