इटावा।जंगे आजादी के महान सपूत भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री भारतरत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद की वफात (पुण्यतिथि) पर स्थानीय मोहल्ला मेहतर टोला में हाजी अब्दुल माबूद अंसारी साहब के निवास स्थान पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं ने मौलाना अबुल कलाम आजाद को खेराजे अकीदत (श्रद्धासुमन) अर्पित किए इस अवसर पर इंसानी भाईचारा बनाओ समिति के राष्ट्रीय संरक्षक एवं इस्लाम पार्टी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ एस अकमल ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
डॉ एस अकमल ने कहा कि मुंबई के ग्वाल टोली मैदान में महात्मा गांधी जी ने दिया था नारा करो या मरो, अंग्रेजों भारत छोड़ो। इस विशाल जनसभा की अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी
डॉ एस अकमल ने कहा कि इस्लाम पार्टी हिन्द देश के सभी क्रांतिकारियों, बलिदानियों एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के साथ शोषित व वंचित समाज में जन्मे सभी महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि हर वर्ष मनाएगी।
डॉ एस अकमल ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के जीवनी पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म अरब में मक्का शहर में हुआ था उनके पिता का नाम मोहम्मद खैरूद्दीन बिन अहमद अल हुसैनी था वह जंगे आजादी के ऐसे महान सपूत थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवादियों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया और अंग्रेजों की फूट डालो राजनीति को परास्त करने में अहम भूमिका निभाई उन्होंने हिंदू, मुस्लिम एकता कोएक धागे में पिरोने का कार्य किया ऐसा करते हुए वह अमर हो गए वह जंगे आजादी के ऐसे सिपाही थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की चूलें हिला दीं यह सब इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। देश का दुर्भाग्य है कि जंगे आजादी के ऐसे महान क्रांतिकारी, त्यागी, महान सपूत को देश के सत्ताधारियों ने जान बूझकर भुला दिया उनके इस स्वर्ण इतिहास को इस्लाम पार्टी हिन्द जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेगी।
डॉ एस अकमल ने कहा मौलाना अबुल कलाम आजाद राष्ट्रीय भारतीय कांग्रेस के लंबे समय तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और उन्हीं के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी गई उन्होंने गांधी,नेहरू, पटेल जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को अपने साथ जोडे रखा और मुंबई की ग्वाल टोली मैदान में गांधी जी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो, करो या मरो का नारा दिया था। उसकी अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी यह सुनहरे इतिहास को संकीर्ण मानसिकतावादी शासको ने भुला दिया। उनकी दयानतदारी, ईमानदारी, निष्पक्षता से ही भारत की आजादी के कपाट खुले थे। मौलाना उच्च कोटि के साहित्यकार, कवि, पत्रकार थे। उनकी जीवनी से देशवासियों को प्रेरणा लेनी चाहिए और जंगे आजादी के जितने भी महान सपूत हैं उनकी जीवनी का अध्ययन करके उसे जन-जन तक पहुंचाने का ध्वजवाहक बनना चाहिए।
कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक, बसपा संस्थापक सांसद मान्यवर कांशीराम के इटावा लोकसभा के चुनाव प्रभारी रहे एवं सियासी अखाड़ा के संपादक खादिम अब्बास ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद भारत बंटवारे के सख्त विरोधी थे जिन लोगों ने भारत का बटवारा अपनी स्वार्थ परक नीति के कारण कराया है वह सारे के सारे बदनुमा चेहरे इतिहास के पन्नों में अंकित है आज देश के बंटवारे में अहम भूमिका निभाने वालों को महिमामंडित किया जा रहा है। उक्त चेहरे बेनकाब न हो जायें इसलिए देशभक्त मौलाना अबुल कलाम आजाद के क्रांतिकारी इतिहास को देश वासियों से छुपाया और दबाया जा रहा है, जितने भी घिनौने चेहरे हैं वह किसी से छुपे हुए नहीं है और न ही उन्हें छुपाया जा सकता है देशवासियों को जंगे आजादी के महान सपूत और सूरमाओं का इतिहास जरूर पढ़ना चाहिए इसी में भारत का कल्याण निहित है
अपने अध्यक्षीय भाषण में हाजी अब्दुल माबूद अंसारी ने कहा कि सांप्रदायिकतावादी शक्तियां एवं संकीर्णतावादी तत्व भारत के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए प्रतिदिन झूठ बोलकर घृणा और नफरत को फैला रहे हैं ऐसे तत्वों के सामने मौलाना अबुल कलाम आजाद और महात्मा गांधी जैसे तमाम क्रांतिकारीयों और बलिदानियों का इतिहास सामने लाना चाहिए। जिससे फिरका परस्त ताकतों का अंत हो सके भारतीय संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए क्रांतिकारियों और बलिदानियों के संघर्षपूर्ण इतिहास से ही देश की एकता और अखंडता, लोकतंत्र व संविधान सुरक्षित रह सकता है।
अब्दुल माबूद अंसारी ने कहा कि बिना प्रेम सदभाव के जानवरों के गिरोह तो जिन्दा रह सकते हैं इंसान एक पल जिन्दा नहीं रह सकता।
मोहम्मद खालिद अंसारी (मुन्ना बाबू) पत्रकार मोहम्मद इदरीश फारूकी व राजू मंसूरी ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद की जो देश को आजाद कराने के लिए कुर्बानियां रही हैं उन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
इस्लाम पार्टी हिंद के जिला अध्यक्ष एडवोकेट तस्लीम खान मंसूरी ने कहा कि कौम के नौजवानों को सियासत में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए तभी उनकी तकदीर व तस्वीर बनेगी जंगे आजादी के महान योद्धा मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देश को आजाद कराने के लिए जो जोखिम भरे कारनामें अंजाम दिए हैं उन्हें जन जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है इससे ही सांप्रदायिकता वादी तत्वों द्वारा जो नफरत और घृणा फैलाई जा रही है इसका अन्त मौलाना अबुल कलाम आजाद की राष्ट्र भक्ती का बखान करके अंत किया जा सकता है।
एडवोकेट तस्लीम खान मंसूरी ने कहा कि जब बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने देश के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के हाथों में भारतीय संविधान सौंपा था उस समय शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू व गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल भी मौजूद थे। संगोष्ठी का संचालन जमशेद अख्तर अंसारी ने किया।
इस मौके पर रामदास, अशोक गोयल, राम नरेश यादव, संदीप कुमार आदि की उपस्थिति उल्लेखनी रही। जिन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।









