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February 17, 2026 1:13 pm

प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर यूपीयूएमएस प्रशासन सख्त प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ होगी विधिक कार्यवाही

इटावा सैफई उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्यरत् चिकित्सा शिक्षक (फैकेल्टी मेम्बर), चिकित्सा अधिकारी, सीनियर रेजीडेंट व जूनियर रेजीडेंट जो प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होंगे उनके खिलाफ विधिक तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 डा0 पीके जैन ने आदेश जारी करके प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ विधिक एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की बात कही है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 चन्द्रवीर सिंह ने दी। उन्होंने आगे यह भी बताया कि इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय प्रशासन सभी चिकित्सा शिक्षक (फैकेल्टी मेम्बर), चिकित्सा अधिकारी, सीनियर रेजीडेंट व जूनियर रेजीडेंट से इस सम्बन्घ में अनिवार्य शपथ पत्र भी ले चुका है। यदि कोई फैकेल्टी या चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही करने के साथ ही शासन को भी सूचित किया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार यदि कोई भी चिकित्सा शिक्षक/चिकित्सक जो उत्तर प्रदेश के किसी भी राजकीय या अन्य मेडिकल कालेजों में फैकेल्टी या चिकित्सक के रूप में जुडा है या कार्यरत् है, प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता। यदि कोई शपथ पत्र देने के बाद भी इसमें लिप्त पाया जाता है तो उस चिकित्सक का प्राइवेट प्रैक्टिस बन्दी भत्ता (एनपीए) के अर्न्तगत भुगतान की गयी पूरी धनराशि वसूली जायेगी साथ ही उसका वार्षिक वेतनवृद्धि रोके जाने के साथ आवश्यक अनुशासनिक कार्यवाही भी की जायेगी। ऐसे चिकित्सकों का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। 

इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 डा0 पीके जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की यह मंशा है कि विश्वविद्यालय में आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले। प्रदेश सरकार का भी उद्देश्य है कि मेडिकल कालेज में कार्य करने वाले चिकित्सक पूरी तरह से विश्वविद्यालय में भर्ती मरीजों पर ध्यान केन्द्रित करें। इन्हीं चीजों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के किसी भी चिकित्सा शिक्षक या चिकित्सक के प्राइवेट प्रैक्टिस की पूरी मनाही है। ऐसा पाये जाने पर नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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