
इटावा: इटावा डिपो के कर्मचारियों ने निजीकरण ठेकेदारी के खिलाफ काली पट्टी बांधकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर रोष व्यक्त किया और सरकार से निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से उनके भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। उन्होंने ठेकेदारी प्रणाली को कर्मचारियों के अधिकारों और रोज़गार की स्थिरता के खिलाफ बताया। प्रदर्शन के उपरांत कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मयंक सिंह को ज्ञापन सौंपा।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनके ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा । इसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
यूनियन का साथ और मजबूती
प्रदर्शन में यूनियन के अध्यक्ष सुखराम सिंह, क्षेत्रीय मंत्री आलोक यादव, और अन्य प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में इस आंदोलन का समर्थन किया। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
1. ठेकेदारी प्रणाली को तत्काल समाप्त किया जाए।
2. कर्मचारियों को स्थाई रोजगार और उचित वेतन दिया जाए।
3. निजीकरण की योजनाओं पर पुनर्विचार हो।
कर्मचारियों का गुस्सा और एकजुटता
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यह केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन है। अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो वे उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
संघर्ष की तैयारी
यूनियन अध्यक्ष सुखराम सिंह ने कहा , हमारे अधिकारों को छीनने की कोशिश की जा रही है। हम इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। निजीकरण कर्मचारियों के लिए एक बड़ा खतरा है, और हम इसके खिलाफ डटकर खड़े रहेंगे।”
इस आंदोलन में कर्मचारियों की एकजुटता और उनकी मांगों को लेकर दृढ़ता साफ झलक रही थी। प्रदर्शन ने स्पष्ट संदेश दिया कि कर्मचारी अपने हक के लिए हर संभव लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
आगे की रणनीति
सभी कर्मचारी और यूनियन नेता अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उच्च स्तर पर उनकी मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाएगा। यदि सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।











