इटावा भारतीय संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की त्रिवेणी पान कुँवर इंटरनेशनल स्कूल के प्रांगण में उस समय जीवंत हो उठी, जब वहां अत्यंत गरिमापूर्ण और सांस्कृतिक वातावरण के बीच “माता-पिता पूजन दिवस” का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर भक्ति और कृतज्ञता के भाव से सराबोर था, जहाँ छात्र-छात्राओं ने अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए अपने माता-पिता का विधिवत तिलक किया, उन पर पुष्प वर्षा की और पूरी श्रद्धा के साथ उनके चरण स्पर्श कर मंगल आशीष प्राप्त किया। यह दृश्य न केवल मनमोहक था, बल्कि आधुनिक युग में विलुप्त होते जा रहे पारिवारिक संस्कारों को पुनः स्थापित करने की एक सशक्त कड़ी के रूप में उभर कर सामने आया।
इस विशेष आयोजन का मूल ध्येय नई पीढ़ी के भीतर अपने जन्मदाताओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और नैतिक उत्तरदायित्व का बीजारोपण करना था। विद्यार्थियों ने भावुक मन से अपने माता-पिता के प्रति आभार प्रकट किया और जीवन के हर मोड़ पर अनुशासन, सदाचार और आदर्श मानवीय मूल्यों का पालन करने का दृढ़ संकल्प लिया। बच्चों के इस निश्छल प्रेम और आदर को देखकर उपस्थित कई अभिभावक अपने अश्रु रोक न सके और भावुक होकर विद्यालय प्रशासन की इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से सराहना की।
इस पुनीत अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक डॉ. कैलाश चंद्र यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि माता-पिता केवल जन्मदाता ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन के प्रथम गुरु होते हैं और उनकी कृपा व आशीर्वाद के बिना जीवन में वास्तविक सफलता या सद्गुणों का विकास संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विद्यालय का निरंतर प्रयास है कि बच्चे किताबी ज्ञान के साथ-साथ अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति से भी गहरे स्तर पर जुड़े रहें।
इसी क्रम में प्रधानाचार्य अरविंद कुमार तोमर ने अपने वक्तव्य में विद्यालय को संस्कारों की पाठशाला बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके कर्तव्यों का बोध कराना है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि विद्यालय के विद्यार्थी आज एक अनुशासित और संस्कारित जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। राष्ट्रगान की गूँज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और समस्त विद्यालय परिवार ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से नैतिक मूल्यों के संवर्धन का संकल्प दोहराया।









