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February 15, 2026 5:21 am

शिक्षा और संस्कारों का संगम: शिक्षाविद अनूप मिश्रा का गौरवमयी सफर

इटावा ​शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले अनूप मिश्रा का व्यक्तित्व सादगी, संघर्ष और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। उनका जीवन सिखाता है कि यदि दृढ़ संकल्प और सही संस्कार हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

​शैक्षिक यात्रा और करियर का आरंभ

​अनूप मिश्रा की प्रारंभिक शिक्षा का आधार वृंदावन मोंटेसरी स्कूल में रखा गया। इसके पश्चात, उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूर्ण की और टीजीटी शिक्षक के रूप में अपनी शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की।

​उनके करियर का सफर 1997 में संत विवेकानंद आवासीय विद्यालय से शुरू हुआ। अपनी कार्यकुशलता के बल पर वर्ष 2000 थियोसोफिकल में वे में जीव विज्ञान के प्रवक्ता (Lecturer) बने। निरंतर कर्मठता का ही परिणाम है कि आज वे थियोसोफिकल इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के रूप में अपनी गौरवशाली सेवाएँ दे रहे हैं।

​उपलब्धि: उनके सानिध्य में पढ़े हुए कई छात्र आज भारतीय संसद तक पहुँचकर देश की सेवा कर रहे हैं, जो उनके उत्कृष्ट शिक्षण का जीवंत प्रमाण है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और संस्कार

​अनूप मिश्रा के व्यक्तित्व निर्माण में उनके पिता स्वर्गीय कमलेश नारायण मिश्रा (पूर्व रेलवे अधिकारी) का अहम योगदान रहा। इकलौते पुत्र होने के बावजूद, उन्हें विलासिता के स्थान पर मानवता और समानता के संस्कार मिले।

​उनकी सफलता के पीछे उनकी धर्मपत्नी सुनीता मिश्रा का अटूट सहयोग है। वे स्वयं एक विदुषी हैं और कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं।

​होनहार संतानें:

​बड़ी बेटी: बी.टेक के बाद वर्तमान में BSNL, पुणे (महाराष्ट्र) में उच्च पद पर कार्यरत।

​छोटी बेटी: बी.कॉम के बाद बेंगलुरु के प्रतिष्ठित बैंक में उच्चाधिकारी।

​पुत्र: वर्तमान में बी.टेक (कंप्यूटर साइंस) की पढ़ाई कर अपने भविष्य को गढ़ रहे हैं।

जीवन दर्शन और संदेश

​एक अनुभवी शिक्षाविद के रूप में अनूप मिश्रा का मानना है कि “शिक्षा के साथ संस्कार का होना अनिवार्य है।” वे युवाओं को तरक्की के साथ-साथ तनावमुक्त रहने की सलाह देते हैं।

​डिजिटल युग और मोबाइल पर विचार:

​वे मोबाइल के उपयोग को लेकर एक बहुत ही सटीक और व्यावहारिक उदाहरण देते हैं:

​”मोबाइल का उपयोग सब्जी में नमक के बराबर होना चाहिए। जिस तरह नमक के बिना सब्जी बेस्वाद है और अधिक होने पर नुकसानदेह, वैसे ही मोबाइल का उपयोग केवल उतना ही करें जहाँ शिक्षा और उद्देश्य की पूर्ति हो।”

​निष्कर्ष

​अनूप मिश्रा का जीवन हमें सिखाता है कि सादगी भरा जीवन और उच्च विचार ही वास्तव में मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है। उनका सफर आने वाली पीढ़ी के शिक्षकों और छात्रों के लिए सदैव मार्गदर्शक रहेगा।

 

आलेख

शिवम दुबे /मो इरफान

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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