इटावा समाज सेवी राजू गुप्ता जैसे निस्वार्थ व्यक्तित्व आज के समय में समाज के लिए एक प्रेरणापुंज है
उनका कार्य करने का तरीका “नेकी कर और दरिया में डाल” वाली कहावत को चरितार्थ करता है।
यहाँ उनके कार्य करने की उन विशेषताओं का वर्णन है, जिनकी वजह से जनता उन्हें ‘देव तुल्य’ मानती है:
1. गुप्त दान और निस्वार्थ सेवा
राजू गुप्ता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे ‘बिना बताए’ मदद करते हैं। शास्त्रों में भी कहा गया है कि दान ऐसा होना चाहिए कि “दाहिने हाथ को पता न चले कि बाएं हाथ ने क्या दिया है।” वे निर्धन कन्याओं के विवाह या अन्य सामाजिक कार्यों में आर्थिक सहयोग देते हैं, लेकिन कभी भी अपने नाम का प्रचार नहीं करते।
2. मान-सम्मान के साथ सहयोग
अक्सर देखा जाता है कि लोग मदद करते समय तस्वीरें खिंचवाते हैं, जिससे मदद लेने वाले के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचती है। लेकिन राजू गुप्ता:
गोपनीयता बनाए रखते हैं: वे निर्धन कन्याओं के विवाह में चुपके से अपनी भूमिका निभाते हैं ताकि परिवार को यह महसूस न हो कि वे किसी के अहसान तले दबे हैं।
सम्मानजनक व्यवहार: वे लोगों की आर्थिक मदद ही नहीं करते, बल्कि उन्हें समाज में बराबरी का सम्मान भी दिलाते हैं।
3. कन्यादान को पुण्य कार्य मानना
निर्धन कन्याओं के विवाह में उनके द्वारा किया गया सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि एक पिता और भाई की तरह निभाया गया कर्तव्य है। उनके इस व्यवहार के कारण ही जनता उन्हें ‘देव तुल्य’ मानती है।
4. बिना पूछे जरूरत को समझना
राजू गुप्ता की संवेदनशीलता इतनी गहरी है कि वे बिना किसी के मांगे ही उसकी पीड़ा समझ लेते हैं। जहाँ भी उन्हें लगता है कि कोई व्यक्ति लाचार है या किसी निर्धन परिवार को मदद की सख्त जरूरत है, वे वहां बिना किसी औपचारिकता के पहुँच जाते हैं।
जनता का नजरिया: > समाज में ऐसे लोग विरले ही होते हैं जो बिना किसी राजनीतिक या निजी स्वार्थ के, प्रचार की चकाचौंध से दूर रहकर मानवता की सेवा करते हैं। राजू गुप्ता द्वारा चुपचाप किए गए ये कार्य ही आज उन्हें जनता के बीच इतना सम्मानित बनाते हैं।
आलेख
शिवम दुबे/मो इरफान
इटावा









