बचाव पक्ष के अधिवक्ता अखलेश कुमार यादव ने पेश की अभूतपूर्व दलीलें
इटावा सितम्बर। इटावा अपर जिला न्यायालय पोक्सो की विद्वान न्यायाधीश विनीता विमल ने सामुदायिक दुष्कर्म के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अभियुक्त रामचंद्र उर्फ मोनू पुत्र रामचंद्र तथा पुष्पेंद्र यादव उर्फ रोमी पुत्र रंजीत निवासी मानिकपुर विशुन थाना इकदिल को दोष मुक्त कर दिया है।
गौरतरब है कि उपरोक्त अभियुक्तों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी (सामुहिक दुष्कर्म) 342, 323, 34 पास्को अधिनियम की धारा 5 जी/6 के तहत गंभीर आरोप लगे थे। अदालत ने पीड़िता के बयान में विरोधाभास होने पर तथ्यों का विश्लेषण करने पर वास्तु स्थिति से स्पष्ट हुई। अभियुक्त ने कोई कांड नहीं किया था । इस बीच बचाव पक्ष के वकील अखिलेश कुमार यादव में तार्किक तथ्यों के आधार पर विद्वान न्यायाधीश ने उक्त निर्णय दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता की रणनीति कारगर रही जिसके चलते अदालत को अभियुक्तों को दोष मुक्त करना पड़ा।
पीड़िता के विरोधाभासी बयानों के खिलाफ अदालत में धारा 22 के अंतर्गत कार्रवाई कर सकती है। इस बाबत अदालत द्वारा पीड़िता से पूछा गया कि क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए? इसके साथ ही ऐसे प्रकरण में पीड़ित व्यक्ति को ‘पीड़िता’ शब्द से संबोधित किया जाएगा ऐसा विशेष आदेश दिया गया।









