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February 14, 2026 10:50 pm

10 साल में 162 बार विदेश यात्रा, 300 करोड़ का घोटाला, गाजियाबाद फर्जी दूतावास केस में बड़ा खुलासा

गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में फर्जी दूतावास मामले की जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे ही एक-एक कर कई हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं।फर्जी दूतावास के जरिए लगभग 300 करोड़ रुपए के घोटाले की बात सामने आ रही है।फ़र्ज़ी दूतावास चलाने के आरोप में हर्षवर्धन जैन को बीते दिनों ग़ाज़ियाबाद के कवि नगर में किराए के दो मंज़िला मकान से यूपी एसटीएफ ने गिरफ़्तार किया था।इस मकान के बारे में हर्षवर्धन जैन ने दावा किया था कि वह एक दूतावास है।जांच में पता चला कि उसने पिछले 10 साल में 162 विदेश यात्राएं की और कई विदेशी बैंकों में खाते भी हैं।

 

एसटीएफ की जांच में पाया गया कि हर्षवर्धन जैन कथित तौर पर एक नौकरी रैकेट चलाने में शामिल था और हवाला के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल था।छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने फ़र्ज़ी राजनयिक नंबर प्लेट वाली चार कारें और लग्ज़री घड़ियों का एक कलेक्शन ज़ब्त किया।एसटीएफ अब अदालत में जैन की हिरासत की मांग करेगी।जैन लगभग 300 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल हो सकता है।

 

भारत और वेस्टआर्कटिका के झंडे

 

कवि नगर में एक आलीशान दो-मंजिला इमारत के बाहर एक नाम पट्टिका लगी थी,जिस पर ग्रैंड डची ऑफ़ वेस्टआर्कटिका और महामहिम एच.वी. जैन मानद कौंसल लिखा था। इमारत में भारत और वेस्टआर्कटिका के झंडे लगे थे। वेस्टआर्कटिका अंटार्कटिका का एक छोटा देश है,जिसे दुनिया का कोई भी संप्रभु राज्य मान्यता नहीं देता।जांचकर्ताओं के मुताबिक जैन इस माध्यम का इस्तेमाल नेटवर्किंग के लिए करता था और फिर लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का लालच देता था। जांच से पता चला है कि यह नकली दूतावास 2017 से चल रहा था। जैन अपने रुतबे को बरकरार ऱखने लिए दूतावास के बाहर भंडारे का आयोजन करता था। उसने छह महीने पहले ही इस मकान को किराए लिया था।जैन करीब आठ साल से फर्जी दूतावास चला रहा था।

 

धर्मगुरु लिंक

 

नकली दूतावास पर छापेमारी के दौरान एसटीएफ को विवादास्पद धर्मगुरु चंद्रास्वामी और सऊदी हथियार डीलर अदनान खशोगी के साथ हर्षवर्धन जैन की तस्वीरें मिलीं। चंद्रास्वामी 80 और 90 के दशक में काफी प्रभावशाली थे। उन्हें तीन प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिम्हा राव,चंद्रशेखर और वीपी सिंह का आध्यात्मिक सलाहकार माना जाने लगा। वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में वे जांच के घेरे में आए और 1996 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके आश्रम पर छापे में अदनान खशोगी के साथ लेन-देन का भी खुलासा हुआ। चंद्रास्वामी पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए धन मुहैया कराने का भी आरोप था।

 

एक बड़ा घोटाला

 

यूपी एसटीएफ ने जांच में पाया है कि चंद्रास्वामी ने ही जैन को अदनान खशोगी और ठग अहसान अली सईद से मिलवाया था। सईद पर आरोप है कि उसने जैन के साथ मिलकर 25 फर्जी कंपनियां खोलीं,जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया। हैदराबाद में जन्मा सईद बाद में तुर्की का नागरिक बन गया।सईद स्विटजरलैंड में वेस्टर्न एडवाइजरी ग्रुप नामक एक कंपनी चलाता था,जो कंपनियों से संपर्क करती थी और उन्हें ब्रोकरेज के बदले लोन दिलाने में मदद करने का वादा करती थी। आरोप है कि इस कंपनी ने 2.5 करोड़ पाउंड यानी करीब 300 करोड़ रुपये की दलाली ली और स्विस क्षेत्र से भाग गई। अहसान अली सईद को 2022 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ अब इस बड़े घोटाले में हर्षवर्धन जैन की संलिप्तता की जांच कर रही है।इससे पहले एसटीएफ को पता चला था कि जैन ने नेटवर्किंग के लिए फर्जी दूतावास और राजनयिक आवरण का इस्तेमाल किया और लोगों को नौकरी का लालच दिया।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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