जसवंतनगर/इटावा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विभिन्न विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा को लेकर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन उच्च प्राथमिक विद्यालय कुरसेना, कंपोजिट विद्यालय जसवंतनगर एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय मलाजनी में किया
खंड शिक्षा अधिकारी गिरीश कुमार ने कुरसेना में कहा कि इस प्रकार की विधिक जागरूकता से बच्चों में आत्मबल और जागरूकता दोनों बढ़ती है, जो उन्हें सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर नागरिक बनने में मदद करती है। इन विधिक जागरूकता शिविरों का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और सुरक्षा से संबंधित जानकारी देकर उन्हें एक सशक्त भविष्य के लिए तैयार करना है।
बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रेम कुमार शाक्य ने चाइल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में बताया। कोई भी बच्चा किसी भी समय सहायता प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना व स्पॉन्सरशिप के तहत संकटग्रस्त व अनाथ बच्चों के लिए सरकार द्वारा दी जा रही सहायता की जानकारी दी।
शिविर में पीएलवी ऋषभ पाठक एवं कुमारी नीरज ने बताया कि बाल श्रम निषेध संविधान के अनुच्छेद 24 एवं बाल श्रम अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से श्रम कराना निषिद्ध है। यौन अपराधों से सुरक्षा हेतु पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 4, 7 और 9 के अंतर्गत बच्चों को लैंगिक शोषण से कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है। बच्चों को गरिमा से जीवन जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राप्त है। समानता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार प्राप्त हैं।
पीएलवी रामसुंदर दुबे ने बच्चों को उपरोक्त अधिनियमों के साथ-साथ शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी दी, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले।
पीएलवी लालमन बाथम ने बच्चों को खेल और आराम का अधिकार के महत्व को समझाया और बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलना और विश्राम करना भी बच्चों का संवैधानिक अधिकार कार्यक्रमों में शिक्षक व अभिभावक भी उपस्थित रहे।









