वेतन विवाद के चलते एक वर्ष विलंब के बाद शुरू हुई तैनाती
इटावा। लगभग एक वर्ष की प्रतीक्षा के बाद इटावा जिले में पूर्व सैनिकों की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनाती आखिरकार शुरू हो गई है। रविवार को बाबा भीमराव आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में उत्तर प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम से आए एक दर्जन पूर्व सैनिकों ने सुरक्षा की कमान संभाली। यह तैनाती शासन द्वारा पूर्व में जारी आदेश के अंतर्गत की जा रही है, जिसके तहत जिले में कुल 37 पूर्व सैनिकों को नियुक्त किया जाना है। इनमें से अब तक 17 की तैनाती पूरी हो चुकी है और शेष को दो से चार दिनों में तैनात कर दिया जाएगा।
तीन शिफ्टों में सुरक्षा व्यवस्था
पूर्व सैनिकों की ड्यूटी तीन शिफ्टों में रोस्टर के आधार पर तय की गई है, ताकि अस्पताल परिसर में चौबीसों घंटे सुरक्षा बनी रहे। जिला अस्पताल में 10 पुरुष पूर्व सैनिक और महिला अस्पताल में 2 महिला पूर्व सैनिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी सूबेदार राजेश कुमार कर रहे हैं, जो निगम के सुपरवाइजर हैं। उन्होंने बताया कि “हमारा प्रयास है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सभी सुरक्षाकर्मियों को अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है।”
साल भर देरी का कारण बना वेतन विवाद
हालांकि शासन द्वारा तैनाती का आदेश पिछले वर्ष ही जारी कर दिया गया था, लेकिन वेतन असमानता को लेकर विभागीय असमंजस और निर्णय में देरी के कारण सुरक्षा कर्मियों की तैनाती एक वर्ष तक अटकी रही। बताया गया कि आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों का वेतन नए तैनात किए जा रहे कर्मियों से कम था, जिस कारण आपत्ति और विचार-विमर्श की प्रक्रिया लंबी खिंच गई। अंततः उच्च स्तर पर सहमति बनने के बाद तैनातियों की प्रक्रिया को हरी झंडी दी गई।
सीएचसी स्तर पर भी हो रही तैनाती
संयुक्त जिला अस्पताल के अलावा जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों—भरथना, जसवंतनगर, महेवा और सरसईनावर—पर भी पूर्व सैनिकों की तैनाती की जा रही है। भरथना और जसवंतनगर सीएचसी पर पहले ही दो-दो पूर्व सैनिक तैनात हो चुके हैं, जबकि अन्य केंद्रों पर भी जल्द ही सुरक्षाकर्मी पहुंच जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में भी सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
पूर्व सैनिकों की तैनाती से जिला अस्पताल सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था न केवल बेहतर होगी, बल्कि अनुशासन व व्यावसायिक दक्षता का भी नया मानक स्थापित होगा। अस्पताल प्रशासन और आम जनता ने इस पहल का स्वागत किया है।









