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February 15, 2026 7:50 am

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट व न्यायालयों में फैले भ्रष्टाचार को लेकर अधिवक्ताओं ने हड़ताल रखी

इटावा। इटावा न्यायालयों में व्याप्त घनघोर भ्रष्टाचार व अनियमितताओं को लेकर इटावा कचहरी के अधिवक्ताओं ने एक जुट होकर न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया उक्त फैसले में डी.वी.ए. व सी.वी.ए. के समस्त अधिवक्तागण शामिल थे। इसके अलावा एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट अतिशीघ्र लागू किये जाने की मांग भी प्रमुख रूप से शामिल थी। ज्ञापन की प्रति जिला जज व जिलाधिकारी इटावा को दी गई।

डी.वी.ए. के अध्यक्ष अनिल कुमार गौर महामंत्री देवेन्द्र पाल सिंह सी.वी.ए. अध्यक्ष अनिल कुमार तिवारी महामंत्री अरूण कुमार गुप्ता तथा कार्यकारिणी की एक बैठक कर सर्व सम्मति से न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया।

उक्त जानकारी डी.वी.ए. के मीडिया प्रभारी मनोज कुमार दीक्षित व रूपेन्द्र सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से प्रेस को देते हुये बताया कि इटावा न्यायालयों मंे भारी पैमाने पर अनियमिततायें वरतीं जा रहीं हैं। न्यायिक अधिकारीगण कानून से परे प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध आदेश पारित कर रहे हैं। इसलिए गरीबों को कोई न्याय की आशा ही नहीं रह गयी है। धनाड्य लोग अपने अनुसार न्याय प्राप्त कर रहे हैं और कहने पर अधिकारीगण अक्सर अपमानजनक टीका टिप्पणी करते हैं जिससे अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है। ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायालयों में अधिकारीगणों के सामने बाबूगण व चपरासी अवैध वसूली भी करते हैं और अधिकारीगण कोई कार्यवाही नहीं करते हैं और न ही उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। न्यायालयों में जुर्माना की अधिक धनराशि वसूल की जाती है और कम धनराशि की रसीदें दीं जातीं हैं। बाबुओं को विशेष लाभ पहुंचाया जा रहा है तथा उनसे एक ही अदालतों में वर्षों से कार्य कराया जा रहा है और न हटाया जाना भी अनियमितताओं को बढ़ावा देता है। महिलायें न्यायिक अधिकारीगण कानून व तथ्यों के विरूद्ध आदेश पारित कर रहे हैं। अधिवक्ता जो उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालयों की रूलिंग दाखिल करते हैं उनका जिक्र व उनका अनुपालन आदेशों में नहीं करते हैं और न ही उनको मानते हैं। अधिवक्तागणों की समस्याओं को हल करने के लिये कोई कोर्डिनेशन समिति नहीं बनायी गयी है जिससे अधिवक्तागण अपनी समस्यायें नहीं रख पाते हैं। प्रशासनिक जज उच्च न्यायालय के बार के पदाधिकारियों से नहीं मिलवाया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि सरकारी वकील अवैध वसूली में लिप्त हैं होशटाइल गवाही करवाने के एवज में 1-1 लाख रूपये वसूल कर लेते हैं। न्यायिक अधिकारी भी सरकारी वकील की मर्जी से चलते हैं। परिवार न्यायालय में 13बी के केस में लम्बी-लम्बी तारीखें लगायीं जातीं हैं। कचहरी परिसर में पेय जल शौचालय एवं सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है और न ही न्यायालयों में अधिवक्तागणों के बैठने की समुचित व्यवस्था है। आज कचहरी पर हजारों अधिवक्ताओं ने एक मत होकर जिला जज के समक्ष पेश होकर अपनी समस्याओं को बारी-बारी से रखा तथा समस्याआंे के निवारण की मांग की।

Mohammed irfan
Author: Mohammed irfan

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