इटावा सफारी पार्क में क्रिसमस के मौके पर तीन नये खास मेहमानों का आगमन हुआ है
लखनऊ के नबाव वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान से तीन बारहसिंघा (Swamp Deer) इटावा सफारी पार्क लाए गए हैं। यह कदम प्राणी संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बारहसिंघा, जिन्हें दलदली हिरण भी कहा जाता है, उत्तर भारत की जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बारहसिंघाओं के स्थानांतरण की योजना के तहत कुल 04 नर और 06 मादा बारहसिंघा को लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। प्रस्ताव को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमोदन प्राप्त हुआ, जिसके बाद प्रारंभिक चरण में 02 नर और 01 मादा बारहसिंघा को आज 23 दिसम्बर को सफारी पार्क में लाया गया।
विशेष देखरेख और सुरक्षा प्रबंध
बारहसिंघाओं के इस सफल स्थानांतरण का कार्य इटावा सफारी पार्क के क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री रूपेश श्रीवास्तव, बायोलॉजिस्ट श्री बी.एन. सिंह, पशु चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र सिंह और अनुभवी कीपरों श्री विनोद कुमार व श्री सुधीर कुमार की देखरेख में संपन्न हुआ।
फिलहाल इन बारहसिंघाओं को हिरण सफारी के एनिमल हाउस में बने विशेष क्वारेंटाइन हाउस में रखा गया है। यह क्वारेंटाइन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि स्थानांतरण के बाद बारहसिंघा पूरी तरह स्वस्थ रहें और सफारी के पर्यावरण में सहज रूप से समायोजित हो सकें।
इटावा सफारी पार्क का महत्व
इटावा सफारी पार्क उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख वन्यजीव संरक्षण स्थलों में से एक है। यहां आगंतुकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलता है। बारहसिंघाओं का आगमन इस पार्क के आकर्षण को और बढ़ाएगा और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
भविष्य की योजना
इटावा सफारी पार्क में जल्द ही बारहसिंघाओं की पूरी टोली देखने को मिलेगी, क्योंकि स्थानांतरण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









